Saturday, 2 January 2016

लाचारी


लाचारी

पुछ बेहटा एक दिन इस दिल से,

की देश की इस लाचारी को क्या नाम दू।

देखा जब कोई भूख़ से बिलकता है,कोई काम को तरसता है,कोई जीते जी 
मरता है,कोई मरने को तरसता है,

ऐसी हालत को देख,ऐ दिल तू बता कैसे मन को लग़ाम दू,

देश की इस लाचारी को क्या नाम दूँ।

भर बेहटा ज़ेब अपनी सब नेता दलाल बन कर,

फिर इस बात पे इन्हें क्या इनाम दू,

कोशिश करता है ,ये मन मदद करने को,पर दिन की रात हो जाये औऱ 
असफलता हात में,तो खुद को कैसे आराम दूँ,

ऐ दिल तू बता इस लाचारी को क्या नाम दूँ|

मदद चाइये इन्हें ,आह भरते है ये,विनती करू या दाम दू|

देश की इस लचारी को अब में क्या नाम दू |

कोशिश आपसे चाइये ,साथ आपका हो,तो अपनों से एक बात कहु की 
मिलकर बदले कुछ हालात अपने,

फिर कौन कहे देश की इस लाचारी को क्या नाम दू ।