Monday, 18 January 2016

मुस्कुराये हुए मुझे मुद्दत बीत गयी,

      मुस्कुराये हुए मुझे मुद्दत बीत गयी,
मुस्कुराये हुए मुझे मुद्दत बीत गयी,
मोहब्ब्त न उनको हुई मुझसे चाहत न मुझे हुई उनसे,
न जाने कैसी कशमकश में था ये दिल ,
आशिकी न उन्हें हुई मुझसे ,
इबादत न मुझे हुई उनसे,
न जाने कैसी कशमकश में था ये दिल,
लिखता रहा प्यार में ख़त उनको,
जवाब न मिला कभी उनसे,साथ न जुड़ा उनका मुझसे,
न जाने कैसी कशमकश में था ये दिल,
लोग मुझे युही उनके नाम पे बदनाम करते रहे हर पल,
मुस्कुराता रहा में हर लब और इतराती रही वो हर दम,
न जाने कैसी कशमकश में था ये दिल, न जाने।।
कवी -निशित लोढ़ा