Monday, 18 January 2016

हैरत में हूँ

                  हैरत में हूँ
मुद्दत के बाद इक इंसान मिला हैरत में हूँ ।।
इतना आदर औ सम्मान मिला हैरत में हूँ ।।
दिल के कमरे का ताला खोला जब भी मैंने।
कितना रद्दी का सामान मिला हैरत में हूँ ।।
ख्वाबों की गलियों में आज टहलने निकला तो ।
अश्क़ बहाता हिन्दुस्तान मिला हैरत में हूँ ।।
सच के बांट बराबर रखकर तौले थे रिश्ते ।
फिर भी जाने क्यू नुकसान मिला हैरत में हूँ ।।
जिसके चेहरे पर खुशियों का पौडर था जितना ।
अंदर से उतना बेजान मिला हैरत में हूँ ।।
दौलत की चाहत ने इतना अंधा कर डाला ।
सड़कों पर बिकता ईमान मिला हैरत में हूँ ।।
तेरे ख्यालों के आँगन में गज़लों की खातिर ।
"राही" रोज नया उन्वान मिला हैरत में हूँ ।।