Monday, 27 June 2016

मेरी मोहब्त

ग़र दिल  तुम्हारा  इतनी  इनायत  नहीं  करता !
बे-ख़ौफ़  हो के  मैं भी  मौहब्बत  नहीं  करता !

इस दिल  ने तो  चाह है  तुम्हे टूट  के फिर भी ।
किस दिल से कहा तुमने मोहब्बत नहीं करता ।

ये ख़ास करम मुझपे किया होता न अए-दोस्त ।
दिल  टूटने  की  तुमसे  शिकायत  नहीं करता ।

गर  तुम  हसीं  न  होते  गर  मैं  जवाँ  न होता ।
ख्वाबों  मैं  ला के  तुमसे शरारत  नही  करता ।

इक़  प्यार  के  सिवाये  ज़माने  मैं अए - सनम ।
कुछ भी तो बिन तुम्हारी  इजाज़त नहीं करता ।

मैं  तो  हूँ  मेरे  दोस्त  मोहब्बत   का  बादशाह ।
नफ़रत  भरे  दिलों   पे   हुकूमत   नहीं  करता !

दिल को झुका  के यार के  सजदे  किये तो  हैं ।
किसने  कहा मैं  इबादत नहीं करता ।