Tuesday, 14 June 2016

शायराना १

शायराना १

न जाने क्यों दूर हो मुझसे ,
अक्सर राहों में दिख जाते हो,
पास नहीं होते हो मेरे ,
फिर क्यों सपनो में इतना आते हो।

निशित लोढ़ा