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Friday, 24 January 2020

में हु

में हु 



में लिखू क्या, में ख्याल हु ,
में हु तो एक सवाल हु,

नाराज़गी तो है तुम्हे ,
में कहु तो माफ़ी ,न कहु , तो इलज़ाम हु ,

में दर्द हु,में मर्ज़ हु ,
हु तो में ,कमाल हु ,

कोई बात है , कहो मुझसे,
कहुँ !!तो बेमिसाल हु,

ये लफ्ज़ बने अलफ़ाज़ मेरे,
मेरे शब्द का में सवाल हु ,

में ज़िन्दगी को निहारता ,
में जीता बन बवाल हु ,

ख्वाइश है कोई ,तो कहना मुझसे ,
में आलम हु,में जवाब हु,

शब्दों का सौदागर समझा जिसने,
में हु तो, जवाब! न समझो तो ख्याल हु।

निश


Sunday, 16 June 2019

में हु परछाई

में हु परछाई

एक कदम दूर हु ,
फिर भी हु में पास तेरे ,
जुड़ा हु तुझसे ,जैसे हु कोई परछाई ,

देख तेरे साथ हु,देख तेरे पास कही,
तू जब भी महसूस करे,में तेरे पास वही,
जुड़ा हु उस वक़्त में तुझसे  ,जैसे हु कोई परछाई ,

में अंधेरो में हु खोया ,
में उजालो में हु पास वही  ,
क्यूंकि जुड़ा हु में तुझसे ,जैसे हु कोई परछाई ,

अकेला न समझना खुदको,
अकेलेपन में ,में तेरे पास वही ,
जब भी ढूंढे मुझको ,में हु वहा, जैसे हु कोई परछाई।


" निश "