Monday, 20 May 2019

लिख देता हु

लिख देता हु 



तुमसे हुई ये जो मुलाकात ,
कलम कि सियाही के सहारे लिख देता हु ,

ये हुई जो हमारी बात ,
उसे पन्ने के एक तरफ़ा लिख देता हु,

मान  लिया मोहबत तो नहीं है हमसे ,
इश्क़ तो है ,चलो जज़्बात लिख देता हु,

तुम खोये में खोया ,दूर हो ,
चलो ये इंतज़ार लिख देता हु ,

कश्मकश है बड़ी ,तुमसे मिलने की चाह की ,
ऐतबार ही सही ,इंकार तेरा लिख देता हु ,

एक आशिक़ हु ,मेरी आशिकी समझना,
में दर्द ऐ एहसास,फिर एक बार लिख देता हु ,

कोई पल छूट न जाये इस दफा ,
में फिर एक तरफ़ा प्यार अपना लिख देता हु।


निश 

Sunday, 19 May 2019

कीमत

कीमत

किस बात कि कीमत लगाते हो,
एक आशिक को क्यों आज़माते हो,

फितूर देखा कभी उसकी मोहबत का,
वो तड़प ,उस दर्द में रुलाते हो,

न आंसू देखे चहेरे पे,न देखे दुख दर्द कही,
एक याद है जो सपनो जैसी,वो याद क्यों दे जाते हो,

कहे दो की नही इश्क़ हमसे,
न हुआ कभी प्यार है, क्यों आंसू छलकते देखा हमने,
क्यों दर्द ऐसा दे जाते हो,

माना कि नही शायर है हम,
पर कोई कहानी ही लिख देते है,
एक बात याद आती है, कि हर रात तुम सपने में आते हो।

निश

Thursday, 16 May 2019

मन करता है

मन करता है 

कुछ नग्मे लिखने का मन करता है ,
तेरे संग इस बारिश में, अब भीगने का मन करता है,

हवाओ का रुख तो मुझे मालूम नहीं ,
पर तेरी इन उड़ती ज़ुल्फो में,फिर खोने का दिल करता है,

ये बादल भी अब बिजली खडका उठे ,
शायद तेरी तस्वीर लेने का उसका भी मन करता है ,

अब थाम लिया है ,मेने हाथ जो तेरा ,
अब तुझसे दूर न होने का कोई मन करता है ,

इस दिल की ख्वाइश में बस तू है ,
तो इस दिल को अब कहा रोने का मन करता है ,

चल भीग लेते है इस मौसम में ,
अब जीने को फिर ,थोड़ा मन करता है।

निष्

Thursday, 9 May 2019

नहीं आता

नहीं आता 


मोहबत को पेसो से तोलना नहीं आता ,
इश्क़ को लफ्ज़ो से बोलना नहीं आता ,
लिख देता हु अक्सर शायरी में ,
पर अब प्यार में दिल खोलना नहीं आता।  

Saturday, 4 May 2019

तेरा ज़िकर कर रहा हु

तेरा ज़िकर कर रहा हु 

अरसे बाद आज कुछ लिख रहा हु,
इसी बहाने चल तेरा ज़िकर कर रहा हु ,

अलफ़ाज़ तो नहीं है  कुछ  कहने और सुनाने को,
पर एक याद है ,चल में लिख रहा हु,
इसी बहाने तेरा ज़िकर कर रहा हु ,

जहा खोया हु में तेरी यादों में ,
तो खोयी है बस अपने सपनो में ,
न तोड़ूगा तेरी ये नींद ,क्यूंकि तू भी है मेरे अपनों में ,
इजाज़त है तुझे जाने कि  ,
कोई बंधन न होगा तुझे ,रोकने को ,
पर एक याद है जो लिख रहा हु ,
इसी बहाने तेरा ज़िकर कर रहा हु ,

अनजान होगी मेरी  मोहबत से ,
मेरी इश्क़ ऐ वफ़ा  का ज़िकर कर रहा हु,
तुझे बेवफा लगूंगा मगर,
में तो आज भी तेरी याद में लिख रहा हु,
इसी बहाने तेरा ज़िकर कर रहा हु ,

भूल चुकी होगी  मुझे,
क्या मालूम में कभी भूल न पाया तुझे,
शायद ये अलफ़ाज़ से वाकिफ न होगी तू ,
पर बस  तेरी याद में ये जो लिख रहा हु ,
इसमें तेरा ही ज़िकर कर रहा हु ,

ये रात का आलम ,ये याद दिलाता है तेरी,
काश वाकिफ होती तू मेरी इस मोहबत से,
एक इलज़ाम के साथ ही लिख रहा हु,
इसी बहाने तेरा ज़िकर कर रहा हु। ... 

निश

Monday, 19 November 2018

दास्तान

कुछ शब्दों में कहूँ तो कहानी ,
कुछ लफ़्ज़ों में कहूँ तो अलफ़ाज़
और कुछ पल में कहूँ तो बस एहसास,
बस यही दास्तान है।।

Monday, 6 August 2018

दोस्ती के नग्मे

दोस्ती के नग्मे 

खिले  गुलाब की दोस्ती ,
 मेरे यार मुझे सताते है ,
मेरी यारी है बस तुमसे ,
 साले दिल चुरा लेजाते है।


खिले गुलशन से दोस्ती ,
मेरे यार मुझे सताते है ,
में रहु या न रहु  ,
वो याद बहुत आते है.

एक दिल चुरा ले गए ,
मेरे दोस्त की बात अलग है
वो हो जा कही ,
हमारी यारी की सौगात अलग है।



happy friendship day