Monday, 25 April 2016

जाने में कौन था

      जाने में कौन था

सवालो से घिरा ,खुद में उलझा ,
मंज़िल को ढूंढता, जाने में कौन था ,

मोहबत कर बेहटा ,प्यार में रहेता ,
सपनों में खोता उनके, जाने में कौन था ,

लिखता में रहता ,जो मन मेरा कहता ,
पन्ने पे थी कहानी मेरी , जाने में कौन था ,

जवाबो की तलाश थी,मंज़िल मेरे पास थी ,
बस अकेला राही था में, सोचता यही जाने में कौन था ,

वो पल भी हसीन थे ,जब सब मेरे करीब थे ,
हस्ता मुझमे उस वक़्त न जाने वो कौन था ,

इंतज़ार किया मैंने ,जीना भी सीखा यादों के सहारे ,
न जाने उस चहेरे के पीछे वो चहेरा कौन था। 

कवि निशित लोढ़ा